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Chairman

Empowering communities with hope, health, and opportunity.
समाज के समग्र विकास के लिए समर्पित।

“कभी-कभी इतिहास किताबों में नहीं,
बल्कि गाँव की मिट्टी में लिखा जाता है…”

Smt. Moti Devi
📍 सौराठ, मधुबनी (बिहार)

श्रीमती मोतीदेवी एक प्रेरणा, एक माँ, एक जीवन दर्शन

मोतीदेवी जी ने बचपन से सीखा कि मेहनत ही पूजा है और प्रकृति ही सबसे बड़ी गुरु। बिहार के मधुबनी जिले के सौराठ गाँव में उनका निवास है। एक साधारण परिवार, मिट्टी का घर और प्रकृति की गोद में पला उनका जीवन स्वयं एक प्राकृतिक चिकित्सा पाठशाला है।

उन्होंने परिवार को केवल पाला नहीं— संस्कारों से सींचा है। वे महिलाओं और बच्चों को सिखाती हैं कि "इंसान जब प्रकृति से दूर होता है, तभी बीमार होता है।"

उनका जीवन सिखाता है कि बड़े शहर नहीं, बड़े दिल चाहिए। धन नहीं, दुआ सबसे बड़ी पूँजी है। और प्रकृति के साथ जुड़ा जीवन ही सच्चा स्वास्थ्य है।

प्रकृति की पाठशाला

“इंसान जब प्रकृति से दूर होता है, तभी बीमार होता है।”

श्रीमती मोतीदेवी जी का जीवन स्वयं एक प्राकृतिक चिकित्सा पाठशाला है। वे मानती हैं कि प्रकृति से लिया गया उपचार शरीर ही नहीं, आत्मा तक को ठीक कर देता है।

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मिट्टी और पेड़ों से संवाद

सुबह सूरज के साथ उठना, मिट्टी से जुड़ना और पेड़ों से बात करना। उनका मानना है कि सच्चा स्वास्थ्य बड़े शहरों में नहीं, बल्कि प्रकृति के करीब रहने में है।

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प्राकृतिक औषधियां

हल्दी, तुलसी, नीम, शहद और अदरक का दैनिक जीवन में उपयोग। वे गाँव की महिलाओं और बच्चों को इन घरेलू और असरदार प्राकृतिक उपायों को अपनाने की शिक्षा देती हैं।

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योग और प्राणायाम

शारीरिक और मानसिक शांति के लिए योग व प्राणायाम का अभ्यास। 80 वर्ष की आयु में भी वे अपनी इस जीवनशैली से पूरे गाँव के लिए एक जीवित प्रेरणा हैं।

80 वर्ष की
जीवित प्रेरणा

उनकी आँखों में अनुभव, हाथों में आशीर्वाद और शब्दों में माँ की ममता है। गाँव का हर व्यक्ति उन्हें माँ के समान सम्मान देता है। उनका जीवन सिखाता है कि बड़े शहर नहीं, बड़े दिल चाहिए।

“धन नहीं, दुआ सबसे बड़ी पूँजी है।”