श्रीमती मोतीदेवी एक प्रेरणा, एक माँ, एक जीवन दर्शन
मोतीदेवी जी ने बचपन से सीखा कि मेहनत ही पूजा है और प्रकृति ही सबसे बड़ी गुरु। बिहार के मधुबनी जिले के सौराठ गाँव में उनका निवास है। एक साधारण परिवार, मिट्टी का घर और प्रकृति की गोद में पला उनका जीवन स्वयं एक प्राकृतिक चिकित्सा पाठशाला है।
उन्होंने परिवार को केवल पाला नहीं— संस्कारों से सींचा है। वे महिलाओं और बच्चों को सिखाती हैं कि "इंसान जब प्रकृति से दूर होता है, तभी बीमार होता है।"
उनका जीवन सिखाता है कि बड़े शहर नहीं, बड़े दिल चाहिए। धन नहीं, दुआ सबसे बड़ी पूँजी है। और प्रकृति के साथ जुड़ा जीवन ही सच्चा स्वास्थ्य है।